आसान भाषा में कहें तो अंतरिक्ष में जो स्टारलिंक सैटेलाइट्स हैं वही आपके के लिए मोबाइल टावर बन जाएंगे। हालांकि स्टारलिंक को इस सर्विस को देने के लिए स्थानीय टेलिकॉम कंपनियों से हाथ मिलाना होगा। इसका फायदा यह होगा कि लोगों के फोन में ‘नो सर्विस’ जैसी कोई चीज नहीं दिखाई देगी। कंपनी पहले टेक्स्ट मैसेज से इस सर्विस की शुरुआत कर सकती है। फिर वॉयस और डेटा सर्विसेज को लाया जाएगा।स्टारलिंक मोबाइल के जरिए दुर्गम इलाकों में भी लोगों के गैजेट कनेक्ट रहेंगे। ऐसी जगह जहां मोबाइल टावर नहीं हैं वहां भी हाईस्पीड इंटरनेट चलाया जा सकेगा। वीडियो दिखाता है कि यूजर को कोई नया फोन लेने की जरूरत नहीं होगी। यह उनके मौजूदा फोन के साथ ही काम करेगा।स्टारलिंक की तरफ से एक वीडियो शेयर किया गया है। यह स्टारलिंक की ‘Direct-to-Cell’ तकनीक को दिखाता है। वीडियो बताता है कि भविष्य में एक नॉर्मल स्मार्टफोन को भी अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक सैटेलाइट से कनेक्ट किया जा सकेगा और लोगों को किसी छतरी यानी डिश लगाने की जरूरत नहीं होगी। वाइस कॉल, वीडियो कॉल, ब्राउजिंग के बाद यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स को भी सपोर्ट करेगा यानी घरों में जितनी स्मार्ट होम डिवाइस हैं, वो भी सैटेलाइट से कनेक्ट होंगी।कंपनी ने अपनी सर्विस डायरेक्ट टू सेल का नाम बदलकर स्टारलिंक मोबाइल भी कर दिया है। कंपनी का दावा है कि नए सैटेलाइट्स से स्ट्रीमिंग करना, इंटरनेट ब्राउजिंग, हाई-स्पीड ऐप्स इस्तेमाल और वॉयस कॉल्स बहुत आसान हो जाएगी। बिलकुल ऐसा फील आएगा, जैसे आप जमीनी मोबाइल नेटवर्क से कनेक्ट हों।मौजूदा वक्त में स्टारलिंक, मोबाइल को सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट करती है, लेकिन विस्तृत रूप से इसे सिर्फ मैसेज भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। स्टारलिंक ने योजना बनाई है कि लोग अब मैसेज के साथ-साथ सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए कॉल और वीडियो कॉल भी कर पाएं और इंटरनेट ब्राउजिंग हो सके।
Source: Navbharat Times March 02, 2026 13:44 UTC