स्टीव जॉब्स का वही दशकों पुराना 'नो एयर स्पेस' वाला सबक आज iPhone 17 Air के रूप में हकीकत बन चुका है। ऐपल ने दुनिया का सबसे पतला आईफोन लॉन्च करके यह साबित कर दिया कि बाकी कंपनियां जहां पहुंचना नामुमकिन मानती हैं, ऐपल उसे हकीकत बनाकर ही छोड़ता है। यह फोन सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि उस विजन की जीत है जो मानता है कि टेक्नोलॉजी को सरल और मिनिमलिस्ट होना चाहिए।जॉब्स द्वारा डेमो मिलने के बाद इंजीनियर्स के पास काम पर लौटने के अलावा कोई और चारा नहीं था। इसके बाद इंजीनियर्स iPod में मौजूद गैर जरूरी जगहों को कम करने के काम में जुट गए। इसके परिणाम में दुनिया को पहला Apple iPod मिल सका। यह किस्सा आज भी टेक जगत में इस बात का उदाहरण है कि जॉब्स कभी भी खराब डिजाइन के लिए असंभव जैसे बहाने स्वीकार नहीं करते थे।स्टीव के लिए Apple कोई डिवाइस बनाने वाली कंपनी भर नहीं थी। उनके लिए Apple नामुमकिन को मुमकिन बनाने का दूसरा नाम था। उन्होंने इंजीनियर्स के मुंह से नामुमकिन सुनकर पास ही पड़े मछली के टैंक में उस iPod को डाल दिया। जैसे ही डिवाइस नीचे गया, उसमें से हवा के बुलबुले निकलकर सतह पर आने लगे। जॉब्स ने उन बुलबुलों की ओर इशारा करते हुए कहा, ये हवा के बुलबुले हैं। इसका मतलब है कि इस डिवाइस के अंदर अभी भी खाली जगह है। इसे और पतला किया जा सकता है।स्टीव ऐपल के पहले iPod को बेहद पतला बनाना चाहते थे। उन्हें अपने इंजीनियर्स के तैयार किए iPod का प्रोटोटाइप पसंद नहीं आया था। ऐसे में उन्होंने iPod को और पतला बनाने की इच्छा रखी। इस पर सभी इंजीनियर्स ने उनकी इस मांग को नामुमकिन बताया। इंजीनियर्स का कहना था कि वह iPod को जितना पतला बना सकते थे, पहले ही बना चुके हैं।
Source: Navbharat Times February 07, 2026 05:28 UTC