World Bicycle Day 2021: साइकिल पार्ट्स से दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल कंपनी बनने तक, 4 भाई ऐसे पहुंचे फर्श से अर्श तक - News Summed Up

World Bicycle Day 2021: साइकिल पार्ट्स से दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल कंपनी बनने तक, 4 भाई ऐसे पहुंचे फर्श से अर्श तक


​कौन थे वे चारों भाई हीरो साइकिल्स की शुरुआत चार भाइयों बृजमोहन लाल मुंजाल, ओम प्रकाश मुंजाल, सत्यानंद मुंजाल और दयानंद मुंजाल ने की थी। इनका जन्म कमालिया पाकिस्तान में एक पंजाबी हिंदू परिवार में हुआ था। सन 1944 में मुंजाल परिवार अमृतसर आ गया और चारों भाइयों ने शुरू किया साइकिल के स्पेयर पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग का कारोबार। उस वक्त यह कारोबार आसान नहीं था, लेकिन दिल में जब कुछ करने का जज्बा हो तो हर मुश्किल हल हो ही जाती है। मुंजाल ब्रदर्स का कारोबार चल ही रहा था कि फिर 1947 में देश का बंटवारा होने के बाद अमृतसर में कारोबारी माहौल काफी प्रभावित हुआ।​लुधियाना पहुंचकर सामने आया ब्रांड 'हीरो' इसकी वजह से चारों भाइयों ने अपना कारोबार लुधियाना में शिफ्ट कर लिया। 1956 में चारों भाई कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग (Component Manufacturing) से एक पूरी साइकिल बनाने पर शिफ्ट हुए और ब्रांड को नाम दिया 'हीरो' (Hero)। हीरो की शुरुआत 50,000 रुपये का बैंक लोन लेकर की गई थी। यह भारत की पहली साइकिल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट थी। पहली साल मुंजाल ब्रदर्स ने 639 साइकिलें बनाईं।​जब गिनीज बुक में आया नाम 1980 के दौर में हीरो साइकिल (Hero Cycle) दुनिया में सबसे ज्यादा साइकिल बनाने वाली बन गई। विश्व के सबसे बड़े साइकिल निर्माता के तौर पर 1986 में हीरो साइकिल का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में भी दर्ज किया गया। मुंजाल ब्रदर्स ने हीरो ग्रुप के बैनर तले कई कारोबार शुरू किए जैसे साइकिल कंपोनेंट्स, ऑटोमोटिव, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, आईटी, सर्विसेज आदि। हीरो साइकिल्स, हीरो मोटर्स कंपनी ग्रुप का हिस्सा है।​अभी हीरो साइकिल्स की कमान किसके हाथ इस वक्त हीरो साइकिल्स के एमडी व चेयरमैन पंकज मुंजाल (Pankaj Munjal) हैं, जो ओमप्रकाश मुंजाल के बेटे हैं। मुंजाल ब्रदर्स में से सबसे बड़े दयानंद मुंजाल की मृत्यु 1960 के दशक में हो गई थी। वहीं 13 अगस्त 2015 को ओमप्रकाश मुंजाल, 1 नवंबर 2015 को बृजमोहन लाल मुंजाल और 14 अप्रैल 2016 को सत्यानंद मुंजाल की मृत्यु हो गई। इस तरह बाकी तीन मुंजाल भाई 1 साल के अंदर ही दुनिया को अलविदा कह गए।​साइकिल के बाद मोटरसाइकिल की दुनिया में कमाया नाम साइकिल की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के बाद हीरो ग्रुप ने टूव्हीलर बनाने की शुरुआत की, जिसे हीरो मैजेस्टिक के नाम से जाना जाता था। यह कंपनी शुरुआती दौर में मैजेस्टिक स्कूटर व मोपेड बनाती थी। 1984 में हीरो ने जापान की दिग्गज दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Honda के साथ हाथ मिलाया और नई कंपनी Hero Honda Motors Ltd की स्थापना की गई। इस कंपनी ने 13 अप्रैल 1985 में हीरो-होंडा की पहली बाइक CD 100 को लॉन्च किया। हीरो और होंडा दोनों कंपनियों की बदौलत Hero Honda Motors Ltd देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी बनी। जिसके बाद हीरो होंडा ने आगे चलकर कई दोपहिया मॉडलों को बाजार में पेश किया। करीब 27 सालों तक हीरो और होंडा ने एक साथ कई बाइक्स को लॉन्च किया था। लेकिन 2011 में दोनों कंपनियां अलग हो गईं और यहीं से नई कंपनी हीरो मोटोकॉर्प की शुरुआत हुई।​हर साल 75 लाख साइकिल बनाती है हीरो साइकिल्स हीरो साइकिल्स की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 75 लाख साइकिल सालाना की है। इसके प्लांट्स पंजाब के लुधियाना, यूपी के गाजियाबाद और बिहार के बिहता में हैं। कंपनी की श्रीलंका में भी अत्याधुनिक फैसिलिटी मौजूद हैं। हीरो साइकिल्स स्टैंडर्ड और प्रीमियम साइकिल सेगमेंट में लीडर है। इसकी बाजार हिस्सेदारी 43 फीसदी है। हीरो साइकिल्स के भारत में 250 सप्लायर्स और 2800 डीलरशिप हैं। कंपनी ने कुछ अन्य साइकिल ब्रांड्स का अधिग्रहण किया है और मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, एशिया और यूरोप में एक्सपोर्ट भी करती है।


Source: Navbharat Times June 03, 2021 06:26 UTC



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