कोरोना संक्रमण के हालात काफी बेहतर: शहर में दो महीने में 36 सौ मरीज घर में हुए स्वस्थ, सिर्फ एक को भेजना पड़ा अस्पताल - News Summed Up

कोरोना संक्रमण के हालात काफी बेहतर: शहर में दो महीने में 36 सौ मरीज घर में हुए स्वस्थ, सिर्फ एक को भेजना पड़ा अस्पताल


Hindi NewsLocalChhattisgarhRaipurIn The City In Two Months, 36 Hundred Patients Became Healthy At Home, Only One Had To Be Sent To Hospitalकोरोना संक्रमण के हालात काफी बेहतर: शहर में दो महीने में 36 सौ मरीज घर में हुए स्वस्थ, सिर्फ एक को भेजना पड़ा अस्पतालरायपुर 5 घंटे पहलेकॉपी लिंकराजधानी में कोरोना संक्रमण के हालात काफी बेहतर हैं, इस बीच राहत की एक खबर यह है कि शहर में पिछले दो माह में होम आइसोलेशन के 36 सौ से अधिक मरीजों में से केवल एक ही मरीज को अस्पताल रेफर करने की नौबत आई है। दूसरी लहर के पीक में हर दिन घर में इलाजरत मरीजों में से 25 से अधिक को देर रात अचानक अस्पताल भिजवाने की नौबत अा रही थी। पीक के गुजरने के बाद यह स्थिति भी सुखद है कि राजधानी में होम आइसोलेशन में कोई मरीज गंभीर स्थिति में नहीं पहुंच रहा है। यही नहीं, पिछले दो माह में कोरोना के मरीज भी कम (केवल 23 सौ) ही निकले हैं।होम आइसोलेशन से स्वस्थ हो रहे मरीजों के लिहाज से भी रायपुर शुरू से ही पूरे प्रदेश में टॉप पर रहा है। अब तक 1.23 लाख से अधिक मरीज घर पर रहकर स्वस्थ हो चुके हैं। अस्पताल में बीते दो माह की अवधि में केवल 1801 मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आई। दरअसल, अस्पताल और घर में रह रहे मरीजों में इस अवधि के 15 दिन पहले के मरीज भी शामिल है। लिहाजा नए मरीजों की संख्या और डिस्चार्ज हुए मरीजों की संख्या से कम है। दूसरी लहर में होम आइसोलेशन में रह रहे अधिकांश मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने की वजह से या दूसरी तकलीफों के चलते जैसे बुखार का न उतरना सिरदर्द या लूज मोशन बने रहना जैसी परेशानियां आती थी। इसके कारण ही मरीज अस्पतालों में या केयर सेंटर में शिफ्ट किए जाते थे।एक्सपर्ट व्यू ; डॉ. निलय मोझरकर एक्सपर्ट-होम आइसोलेशनघर में गंभीर नहीं होना अच्छे संकेतशहर में दो माह में होम आइसोलेशन का केवल एक ही मरीज अस्पताल में रेफर हुआ है। ये इसलिए भी क्योंकि ज्यादातर मरीज अब हल्के लक्षण वाले हैं। परिवारों के भीतर संक्रमण के मामले कम हुए हैं क्योंकि माइल्ड सिस्टम वाले मरीज कम ही लोगों में संक्रमण ट्रांसमिट यानी फैलाते हैं। दूसरी लहर में हर दिन घर में रह रहे मरीजों के फोन भी कॉलसेंटर में बहुत अधिक संख्या में आते थे, क्योंकि मरीजों को कई सारी तरह की दिक्कतें होती थी। अब इक्का दुक्का ही कॉल ऐसे आ रहे हैं, इससे भी पता चलता है कि शहर में कोरोना की स्थिति बहुत ज्यादा कंट्रोल में है।शहर में केवल 4 कंटेनमेंट जोन, परिवारों में भी कम केसरायपुर में कंटेनमेंट जोन की नई गाइडलाइन जिसके अनुसार 2 से अधिक मामले मिलने पर ही किसी घर को कंटेनमेंट जोन बनाना है। उस नए नियम के तहत अब तक सिर्फ 4 ही कंटेनमेंट जोन बने हैं। जिनमें डीडीनगर में 2, सड्डू में एक और कुकरबेड़ा एक अस्पताल को भी कंटेन किया है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि पिछले 15 -20 दिन में शहर में परिवार के अंदर भी केवल एक से अधिक सदस्य संक्रमित नहीं हो रहे हैं। जबकि दूसरी लहर की ढलान पर पिछले माह में नए संक्रमितों में परिवारों से अधिक केस मिल रहे थे।रविवार को 10 से कम केस महिलाओं की संख्या बढ़ रहीरायपुर में रविवार को भी दस से कम केस मिले हैं। करीब 24 सौ जांच में संक्रमितों की तादाद 8 रही है। इसमें भी महिलाओं की संख्या 5 है। बीते डेढ़ माह में महिलाओं में पॉजिटिव की संख्या अधिक निकल रही है। जानकारों के मुताबिक ज्यादतर परिवारों में पुरुष सदस्यों ने वैक्सीन लगवाए हैं, जबकि महिला सदस्यों का वैक्सीन उतनी अधिक संख्या में नहीं हो पाया है। ऐसे परिवार जहां वैक्सीन को लेकर जेंडर असंतुलन आ रहा है, उन परिवारों में ही केस अधिक मिल रहे हैं।बहुत से नए पॉजिटिव ऐसे हैं जो दूसरे राज्यों या प्रदेश के ही अन्य शहरों में शादी-ब्याह या समारोहों में जाकर संक्रमित हो रहे हैं। वैक्सीन लगवाने वालों में कोरोना के केस कम हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत भी नहीं अा रही है।-डा. मीरा बघेल, सीएमएचओ-रायपुर


Source: Dainik Bhaskar July 25, 2021 23:35 UTC



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