लखनऊ में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़: एक्शन के बजाय स्कूलों में चाय-नाश्ता कर रहे जिम्मेदार! - News Summed Up

लखनऊ में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़: एक्शन के बजाय स्कूलों में चाय-नाश्ता कर रहे जिम्मेदार!


निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहे हैं आरटीओ, एआरटीओ, पीटीओबच्चों की सुरक्षा पोर्टल पर बनी ‘लॉलीपॉप’Lucknow : इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘लॉलीपॉप’ साबित हो रहा है। राजधानी में संचालित स्कूली वाहनों को पोर्टल पर दर्ज करने के लिए भले ही 25 टीमें लगी हैं, लेकिन अवैध रूप से संचालित स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान में कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है। बताया जा रहा है कि परिवहन अधिकारी निजी स्कूलों के अंदर जाकर औपचारिकताएं पूरी करते हैं। वहीं दूसरी ओर स्कूलों के बाहर अवैध रूप से सफेद रंग की वैन और इको गाड़ियों में बच्चों को बैठाया जा रहा है। जिम्मेदार लोग संबंध मैनेज करने और नामचीन स्कूल होने के कारण कार्रवाई करने से बचते हैं। शिक्षा बेचने वाले व्यापारियों के निजी स्कूलों में जिम्मेदार कार्रवाई के बजाय चाय-नाश्ता कर बाहर निकल जाते हैं।जिम्मेदार अधिकारी 1 अप्रैल से इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल पर स्कूलों में दर्ज और अनुबंधित वाहनों को पोर्टल पर दर्ज कराने का दावा कर कार्रवाई से बच रहे हैं। देश के कानून में किसी को एक बार से अधिक चेतावनी देकर बिना कार्रवाई के छोड़ना उचित नहीं माना जाता, लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारी अवैध रूप से संचालित स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय 15 दिन की छूट दिए बैठे हैं। अभियान के 12 दिन बीत जाने के बाद भी पोर्टल पर संचालित 50% वाहनों को भी दर्ज नहीं किया जा सका है।जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। विभाग को पता है कि कितने स्कूली वाहनों का पंजीकरण हुआ है, कितने वाहनों के पास फिटनेस है और कितने वाहनों के परमिट समाप्त हो चुके हैं। फिर भी संभागीय कार्यालय का कामकाज ठप-सा नजर आ रहा है। गिने-चुने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय 25 टीमों में शामिल करीब 30 कर्मचारी, 3 पीटीओ और एक एआरटीओ पोर्टल के नाम पर लगे हुए हैं। हजारों स्कूलों और वाहनों के बीच औपचारिक जांच चल रही है, जबकि सड़कों पर अवैध रूप से संचालित स्कूली वाहनों में मासूम बच्चे खतरे भरा सफर तय कर रहे हैं, जिन्हें अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं।एआरटीओ प्रवर्तन आलोक यादव ने बताया कि करीब 750 स्कूली वाहनों को पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया है। इस दौरान अधिकतर गाड़ियों में कैमरा, जीपीएस, स्पीड गवर्नर, आउटर सेफ्टी रॉड, साइड मिरर और सीट बेल्ट नहीं मिली। वहीं कुछ वाहनों में अवैध तरीके से सीटों में बदलाव किया गया है।कुछ वाहनों के खिलाफ इस दौरान कार्रवाई भी की गई।


Source: Dainik Bhaskar April 11, 2026 15:02 UTC



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