5 लाख परिवारों का भरोसा जीतकर Lifecell ने बनाया नया कीर्तिमान, स्टेम सेल संरक्षण में 21 वर्ष का बड़ा मुकाम - News Summed Up

5 लाख परिवारों का भरोसा जीतकर Lifecell ने बनाया नया कीर्तिमान, स्टेम सेल संरक्षण में 21 वर्ष का बड़ा मुकाम


चेन्नई -मार्च 2025: लाइफसेल इंटरनेशनल ने भारत में स्टेम सेल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। कंपनी ने 5 लाख परिवारों तक अपनी पहुंच बनाकर यह साबित किया है कि पिछले 21 वर्षों में भारतीय परिवारों के बीच स्टेम सेल संरक्षण को लेकर भरोसा और जागरूकता लगातार बढ़ी है।कंपनी के अनुसार, यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि उन लाखों माता-पिता के विश्वास का प्रतीक है जिन्होंने अपने बच्चों और परिवार के भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यह विकल्प चुना।लाइफसेल ने वर्ष 2004 में भारत के पहले निजी नाल-रक्त स्टेम सेल संरक्षण केंद्र के रूप में शुरुआत की थी। बाद में कंपनी एशिया की पहली ऐसी संस्था बनी जिसे एएबीबी मान्यता प्राप्त हुई। उस समय भारत में इस तकनीक के बारे में बहुत कम जानकारी थी, लेकिन अब यह जन्म योजना और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा का अहम हिस्सा बनती जा रही है।सामुदायिक संरक्षण मॉडल ने बढ़ाई पहुंचकंपनी ने 2018 में सामुदायिक नाल-रक्त संरक्षण मॉडल की शुरुआत की, जिसने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया। इस मॉडल के तहत योग्य नाल-रक्त इकाइयों को साझा पंजीकरण समूह में जोड़ा जाता है, जिससे भारतीय मरीजों के लिए 97 प्रतिशत तक उपयुक्त मिलान मिलने की संभावना बनती है।इसके बाद 2020 में स्टेममैच मंच शुरू किया गया, जो सामुदायिक समूह में मेल खाने वाले स्टेम सेल दाता खोजने में मदद करता है।लाइफसेल के मुताबिक, उसके पास फिलहाल 85,000 से अधिक योग्य नाल-रक्त इकाइयों का भंडार मौजूद है, जो भारत में भारतीय मूल के स्टेम सेल्स का सबसे बड़ा संग्रह माना जाता है।90 से ज्यादा सफल प्रत्यारोपणकंपनी ने बताया कि उसके सामुदायिक संरक्षण तंत्र के जरिए 90 से अधिक सफल प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इनमें रक्त कैंसर, थैलेसीमिया और अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों के मामले शामिल हैं।बतूल का भारत का पहला सफल दोहरी नाल-रक्त प्रत्यारोपण इसी सामुदायिक समूह के जरिए संभव हो पाया, जिसे कंपनी अपने मॉडल की बड़ी उपलब्धि मानती है।कंपनी नेतृत्व ने क्या कहालाइफसेल इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक मयूर अभया जैन ने कहा, “जब हमने 2004 में शुरुआत की थी, तब अधिकतर भारतीय माता-पिता स्टेम सेल संरक्षण के बारे में जानते तक नहीं थे। आज 5 लाख पंजीकरण तक पहुंचना दिखाता है कि यह अब परिवारों की भविष्य योजना का जरूरी हिस्सा बन चुका है।”वहीं संचालन प्रमुख सुमंथ सारंगपानी ने कहा, “हमारे लिए हर सुरक्षित इकाई केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद परिवार के लिए एक नई उम्मीद है। जब सामुदायिक समूह में सही मिलान मिले और प्रत्यारोपण सफल हुए, तब हमारे मॉडल की ताकत साबित हुई।”दो शहरों में उच्च सुरक्षा भंडारणलाइफसेल की भंडारण सुविधाएं चेन्नई और गुरुग्राम में मौजूद हैं। कंपनी का कहना है कि द्वि-स्थान भंडारण मॉडल के जरिए नमूनों की सुरक्षा और विश्वसनीयता को और मजबूत बनाया गया है।साथ ही एएबीबी और एनएबीएल मान्यताएं वैश्विक गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करती हैं।आगे की दिशाकंपनी के मुताबिक, 5 लाख परिवारों का यह आंकड़ा एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इसका सामुदायिक पंजीकरण मॉडल आने वाले समय में और अधिक परिवारों तक पहुंचने की दिशा में काम करेगा।हर नया पंजीकरण सामुदायिक समूह में एक नई संभावना जोड़ता है, जो किसी अन्य मरीज या परिवार के उपचार में मददगार बन सकता है।Lifecell के बारे मेंलाइफसेल इंटरनेशनल की स्थापना 2004 में हुई थी। आज यह भारत का सबसे बड़ा स्टेम सेल संरक्षण तंत्र है। कंपनी नैदानिक सेवाओं, जैविक उपचारों और मातृत्व-शिशु त्वचा देखभाल क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी रखती है।


Source: Dainik Bhaskar April 09, 2026 01:29 UTC



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