Model Tenancy Act: किराएदार कानून से मकान मालिक और किराएदार दोनों का होगा फायदा, यहां जानिए सबकुछ - News Summed Up

Model Tenancy Act: किराएदार कानून से मकान मालिक और किराएदार दोनों का होगा फायदा, यहां जानिए सबकुछ


किराएदार के अधिकार मॉडल किराएदारी अधिनियम के तहत मकान मालिक को घर के मुआयने, रिपेयर से जुड़े काम या किसी दूसरे मकसद से आने के लिए 24 घंटों का लिखित नोटिस अडवांस में देना होगा। रेंट अग्रीमेंट में लिखी समय सीमा से पहले किरायेदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता, जब तक उसने लगातार दो महीनों तक किराया न दिया हो या वह प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल कर रहा हो। कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए अधिकतम 6 महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया जा सकता है।मकान मालिक के अधिकार किराएदार अगर रेंट अग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी मकान खाली नहीं कर रहा है, तो मकान मालिक को चार गुना तक मासिक किराया मांगने का अधिकार होगा। मसौदे में कहा गया है कि अगर किराएदार रेंट अग्रीमेंट के मुताबिक समयसीमा के अंदर मकान या दुकान खाली नहीं करता है तो मकान मालिक अगले दो महीने तक उससे दोगुना किराए की मांग कर पाएगा और दो महीने के बाद उसे चार गुना किराया वसूलने का अधिकार होगा।मालिक और किराएदार, दोनों की जिम्मेदारी ड्राफ्ट में कहा गया है कि बिल्डिंग के ढांचे की देखभाल के लिए किराएदार और मकान मालिक, दोनों ही जिम्मेदार होंगे। अगर मकान मालिक ढांचे में कुछ सुधार कराता है तो उसे रेनोवेशन का काम खत्म होने के एक महीने बाद किराया बढ़ाने की इजाजत होगी। हालांकि इसके लिए किराएदार की सलाह भी ली जाएगी। मकान मालिक किराएदार को जरूरी सप्लाई नहीं रोक सकता है।कानून लागू करना राज्य सरकारों की मर्जी राज्य सरकारों को मर्जी होगी तो वे यह कानून अपने यहां भी लागू कर सकेंगी। हालांकि, वहां यह कानून पिछली तारीखों से लागू नहीं होगा। यानी, दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में वैसे हजारों प्रॉपर्टी मालिकों को कोई राहत नहीं मिलेगी जिन्हें प्राइम कमर्शल लोकेशन पर भी पुराने अग्रीमेंट्स के मुताबिक बेहद कम किराया मिल रहा है। इस मुद्दे पर जो मुकदमे चल रहे हैं, वे चलते रहेंगे। केंद्र सरकार की हाउसिंग मिनिस्ट्री पहले भी इसी तरह का मॉडल ऐक्ट लाई थी, लेकिन उसे दिल्ली और मुंबई के व्यापारियों के कड़े विरोध के कारण लागू नहीं किया जा सका था। उस कानून में पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स की समीक्षा की भी बात थी।किसे होगा फायदा अधिकारियों का कहना है कि यह मसौदा उन लाखों प्रॉपर्टीज के मद्देनजर तैयार किया गया है जिन्हें उनके मालिक कानूनी पचड़े में फंसने से बचने के लिए किराए पर नहीं लगा रहे हैं। नए कानून के अस्तित्व में आने ले मकान मालिकों का हौसला बढ़ेगा और वे खाली मकानों-दुकानों को बेहिचक किराए पर लगा सकेंगे। आखिरी सरकारी सर्वे के मुताबिक, शहरी इलाकों में 1.1 करोड़ प्रॉपर्टीज इसलिए खाली पड़े हैं क्योंकि उनके मालिकों को लगता है कि कहीं किराएदार उनकी प्रॉपर्टी हड़प न ले।


Source: Navbharat Times June 02, 2021 16:45 UTC



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