Panna News: केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन अब निर्णायक और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। एक ओर प्रशासन द्वारा आंदोलन को राज्य स्तर पर दबाने की कोशिश की जा रही है वहीं दूसरी ओर हजारों आदिवासी किसान, विशेष रूप से महिलाएं हिम्मत हारने के बजाय और अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए चिता आंदोलन तक पहुंच गई हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रही आदिवासी महिलाओं व जय किसान संगठन के नेता सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने सरकार के दमन के सामने आक्रामक रुख अपना रखा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से रोका गया। रास्तों में कई जगह रोका गया, राशन और पानी तक रोक दिया गया धमकियां दी गईं और अब अपने ही गाँव जंगल में धारा 163 लगाकर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।इसे आंदोलनकारियों ने दमन की पराकाष्ठा बताया है। प्रशासन द्वारा धारा 163 लागू कर पन्ना और छतरपुर की सीमाओं को अलग-अलग करते हुए बाहरी व्यक्तियों की आवाजाही पर रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं। इस पर आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब परियोजना एक ही है तो लोगों को इस तरह बांटने का आदेश पूरी तरह अन्यायपूर्ण और गैर-तार्किक है। धारा 163 के बावजूद आंदोलनकारियों ने एक अनूठा रास्ता निकाला है। केन नदी जो पन्ना और छतरपुर की सीमा बनाती है उसी नदी के बीचों-बीच आंदोलन शुरू कर दिया गया है। पन्ना जिले के किसान अपनी सीमा में और छतरपुर जिले के किसान अपनी सीमा में रहते हुए भी संयुक्त रूप से आंदोलन कर रहे हैं। जिससे यह आंदोलन और अधिक मजबूत और प्रतीकात्मक बन गया है। वर्तमान में हजारों आदिवासी महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों के साथ प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर विरोध कर रही हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि या तो उन्हें न्याय दिया जाए या फिर उन्हें मौत दी जाए।
Source: Dainik Bhaskar April 09, 2026 18:54 UTC