भास्कर न्यूज, इंदापुर। इंदापुर तहसील के हिंगणगांव, कांदलगांव, तरडगांव और आसपास के किसानों की जमीनें शासन ने उजनी बांध परियोजना के लिए अधिग्रहित की थीं। लेकिन, इन जमीनों का उपयोग परियोजना के लिए नहीं किया गया है। वर्तमान में ये जमीनें बंजर पड़ी हैं और उनमें बड़ी-बड़ी कटीली झाड़ियां उग आई हैं, जिससे वे अनुपजाऊ होती जा रही हैं। पुणे जिला परिषद के पूर्व सदस्य अभिजीत तांबिले ने मांग की है कि ये जमीनें मूल मालिकों को खेती के लिए वापस दी जाएं ताकि किसानों के अधिकारों की रक्षा हो सके। इस मांग को लेकर तांबिले ने प्रभावित किसानों के साथ कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर जल्द न्याय दिलाने की अपील की।- 1970 के दशक का है मामलाज्ञापन में कहा गया है कि 1970 के दशक में उजनी बांध के किनारे बसे गांवों के किसानों की जमीनें मिट्टी और मुरूम उठाने के लिए अधिग्रहित की गई थीं। उस समय किसानों ने बड़े त्याग के साथ अपनी जमीनें दी थीं। हालांकि, बाद में नीतियों और कार्यान्वयन की कमियों के कारण मूल मालिक अपने अधिकारों से वंचित रह गए। कई किसानों ने अपने खर्च पर पानी का बिल भरकर जमीन को खेती योग्य बनाया, लेकिन मालिकाना हक और कब्जे को लेकर वे आज भी कानूनी और सामाजिक दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।- 2000 एकड़ जमीन का प्रश्नअभिजीत तांबिले ने स्पष्ट किया कि जो जमीनें परियोजना के प्रत्यक्ष उपयोग में नहीं हैं, उन्हें नियम के अनुसार मूल मालिकों को अस्थायी या स्थायी रूप से खेती के लिए लौटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पहले भी किसानों के पक्ष में सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आदेश दिए थे, लेकिन अब जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल के साथ चर्चा कर इसका ठोस समाधान निकालना जरूरी है। लगभग 72 प्रभावित किसानों के हस्ताक्षरों वाला यह ज्ञापन मंत्री भरणे को दिया गया है, जिसमें 2000 एकड़ जमीन पर किसानों के हक सुरक्षित करने की मांग की गई है।- किसानों की पीड़ाकिसान दत्तात्रय सरड़े ने कहा, हमारी जमीन परियोजना के लिए ली गई थी, लेकिन आज वह बेकार पड़ी है। अगर हमें वहां खेती करने दी जाए, तो हमारे परिवार का गुजारा हो सकेगा। दूसरे किसान विजय देवकर ने कहा, जमीन न होने के कारण हमें मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए हमारी जमीन वापस करनी चाहिए। अन्य एक पीड़ित किसान चांगदेव भांगे ने बताया कि, उजनी परियोजना के लिए बलिदान हमने दिया, लेकिन फायदा दूसरों को मिला। उपयोग में न आने वाली जमीन मूल मालिकों को देना ही सच्चा न्याय है।उजनी बांध प्रभावित किसानों की शिकायतों का उचित संज्ञान लेकर शासन स्तर पर जरूरी कार्रवाई के आदेश दिए जाएंगे।- दत्तात्रय भरणे, कृषि मंत्री
Source: Dainik Bhaskar January 06, 2026 10:28 UTC