भास्कर न्यूज, पिंपरी-चिंचवड। आगामी मनपा चुनाव से पहले भाजपा के शासनकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर शहर की राजनीति गरमा गई है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार द्वारा नाम लिए बिना लेकिन सीधे तौर पर भाजपा और भोसरी विधानसभा के बाहुबली विधायक महेश लांडगे पर लगाए गए गंभीर आरोपों से सत्ताधारी भाजपा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पवार ने मनपा की जमा-पूंजी तोड़कर विकास कार्यों के नाम पर टेंडर प्रक्रिया में “रिंग” बनाकर भ्रष्टाचार करने और सत्ता की मस्ती और नशे में मनपा की तिजोरी को लूटने जैसे आरोप लगाए हैं। इस पर भाजपा नेतृत्व हिंदुत्व और विकास की बात कर मनपा में कथित भ्रष्टाचार पर जवाब देने से बचता नजर आ रहा है। गंभीर आरोपों के बाद भी भाजपा की ओर से अब तक दस्तावेजों और तथ्यों के साथ कोई ठोस खंडन सामने नहीं आया है। इसके उलट, आरोपों का जवाब आरोपों और टीका- टिप्पणियों से ही देने की रणनीति अपनाई जाती दिख रही है।- भाजपा शासनकाल में लगे हैं लगातार आरोपभाजपा के सत्ता काल के दौरान मनपा में सड़क, ड्रेनेज, जलापूर्ति, विद्युत कार्य, सड़क सफाई, उद्यान विकास, कचरा प्रबंधन, कोविड काल में सामग्री खरीदी, स्मार्ट सिटी परियोजना और फिक्स डिपॉजिट तोड़कर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने जैसे कई मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगातार लगते रहे हैं। विरोधियों का दावा है कि अनेक परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया में रिंग बनाकर चुनिंदा ठेकेदारों को ही काम दिए गए, कुछ परियोजनाओं की लागत असामान्य रूप से बढ़ी और कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे। लेखा परीक्षण रिपोर्टों में दर्ज आपत्तियां भी इन आरोपों को बल देती हैं। हालिया चुनाव की पृष्ठभूमि पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोपों की झड़ियाँ लगा दी। इन सभी मुद्दों पर भाजपा से स्पष्ट, तथ्यात्मक और दस्तावेजों सहित जवाब अपेक्षित था। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष या स्थानीय नेताओं की ओर से सीधे इन आरोपों पर जवाब देने के बजाय, विपक्ष पर ही प्रत्यारोप किए जा रहे हैं।- आरोपों पर विधायकों एवं नेताओं की चुप्पी क्यों? सवाल यह है कि मनपा में करोड़ों रुपए के विकास कार्यों में वास्तव में क्या हुआ, एफडी क्यों तोड़ी गईं, फैसले किसके हित में लिए गए और इसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही किसकी है? इन सवालों के जवाब जनता को कब मिलेंगे? भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा बैकफुट पर रहती है या ठोस जवाब देकर आक्रामक रुख अपनाती है, इसका फैसला आने वाला चुनाव ही करेगा। शहर में भाजपा के चार विधायक हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के अधिकांश आरोप विधायक महेश लांडगे की ओर ही इशारा करते हैं। अजित पवार ने पत्रकार परिषद में विधायक लांडगे की संपत्ति का मुद्दा भी उठाया। बावजूद अब तक न तो भाजपा के किसी बड़े नेता ने और न ही स्वयं लांडगे ने इन आरोपों का सार्वजनिक रूप से खंडन किया है।
Source: Dainik Bhaskar January 05, 2026 22:12 UTC