Ramnath Kovind in Home Village: कानपुर में गांव की माटी की महक... हेलीपैड से उतरे ही नतमस्तक हुए 'महामहिम', लगाया सर माथे - News Summed Up

Ramnath Kovind in Home Village: कानपुर में गांव की माटी की महक... हेलीपैड से उतरे ही नतमस्तक हुए 'महामहिम', लगाया सर माथे


'सपने में भी नहीं सोचा था बनूंगा राष्ट्रपति' राष्ट्रपति ने कहा, 'मैंने सपने में भी कभी कल्पना नहीं की थी कि गांव के मेरे जैसे एक सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व-निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा। लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह कर के दिखा दिया।''गांव को लेकर भावुक हुए राष्ट्रपति' अपनी जन्मभूमि, अपने गांव पहुंचे राष्ट्रपति भावुक हो गए। उन्होंने कहा, 'मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं। मेरे लिए परौंख केवल एक गांव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है, जहां से मुझे, आगे बढ़कर, देश-सेवा की सदैव प्रेरणा मिलती रही।''मातृभूमि की प्रेरणा से हुआ सब' राष्ट्रपति ने कहा, 'मातृभूमि की इसी प्रेरणा ने मुझे हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से राज्यसभा, राज्यसभा से राजभवन व राजभवन से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा दिया।'बाबा साहब आंबेडर की प्रतिमा पर किया फूल अर्पण राष्ट्रपति कोविंद के कानपुर देहात में अपने पैतृक गांव परौंख के दौरे में बाबासाहेब डॉ बीआर आंबेडकर मिलन केंद्र और वीरांगना झलकारी बाई इंटर कॉलेज पहुंचे। यहां उन्होंने एक समारोह को संबोधित किया।जन्मभूमि की राष्ट्रपति ने की तारीफ राष्ट्रपति ने कहा कि जन्मभूमि से जुड़े ऐसे ही आनंद और गौरव को व्यक्त करने के लिए संस्कृत काव्य में कहा गया है, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात जन्म देने वाली माता और जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी बढ़कर होता है।'बड़ों का सम्मान करना हमारी परंपरा' प्रेसिडेंट ने कहा कि गांव में सबसे वृद्ध महिला को माता तथा बुजुर्ग पुरुष को पिता का दर्जा देने का संस्कार मेरे परिवार में रहा है, चाहे वे किसी भी जाति, वर्ग या संप्रदाय के हों। आज मुझे यह देख कर खुशी हुई है कि बड़ों का सम्मान करने की हमारे परिवार की यह परंपरा अब भी जारी है।


Source: Navbharat Times June 27, 2021 08:47 UTC



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