लालू यादव के इफ्तार पर JDU का 'स्पांसर' वाला खुलासा, नीतीश के करीबी नेता ने बताया RJD ने क्यों तोड़ी 20 साल पुरानी परंपरा

लेखक के बारे में आशुतोष कुमार पांडेय आशुतोष कुमार पांडेय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हैं। डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रानिक पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय हैं। सियासत के अतीत वाले पन्ने, अनसुनी कहानियों को कुरेदने में माहिर। सियासी किस्सों को चुटीले अंदाज में पेश करते हैं। राजनीति, सिनेमा और क्राइम की खबरों पर विशेष पकड़। वर्ष 2005- 2009 के बीच ईटीवी नेटवर्क में 12 'बेस्ट स्टोरी ऑफ द डे' का पुरस्कार। राजनीति शास्त्र और हिंदी पत्रकारिता में डिग्री ली है। 2001 में जनसत्ता, हिंदुस्तान, दैनिक जागरण में स्वतंत्र रूप से लिखने की शुरुआत। इन्हें ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय, प्रभात खबर डॉट कॉम और नेटवर्क 18 में काम करने का सौभाग्य मिल चुका है। चार लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनावों में रिपोर्टिंग और डेस्क का काम। संगीत, रंगकर्म और लोक संस्कृति में दिलचस्पी। पुस्तकों से गहरा लगाव रखते हैं।... और पढ़ें

March 21, 2026 13:00 UTC


MP में महंगी होंगी ई-बाइक और कार, 27 मार्च को खत्म हो रही है टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट, बढ़ जाएगी लागत

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में पांच साल के लिए लागू की गई इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति-2025 के तहत वित्तीय प्रोत्साहन में कमर्शियल ईवी को टैक्स में वर्ष 2027 तक छूट रहेगी, लेकिन ई-बाइक और ई-कारों पर मिलने वाली छूट 27 मार्च को खत्म हो जाएगी। 27 मार्च, 2025 को लागू ईवी पालिसी में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों पर वाहन कर व पंजीयन शुल्क में एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत छूट दी गई थी। लागत बढ़ने से लोग पेट्रोल-डीजल वाहनों की ओर लौट सकते हैं।रेट्रोफिटिंग और कमर्शियल वाहनों के लिए प्रावधान इसके साथ ही ईवी नीति में रेट्रोफिटिंग यानी 15 साल पुराने पेट्रोल-डीजल वाहन को ईवी में बदलवाने पर एक साल तक दी गई छूट भी खत्म हो जाएगी। जबकि किट नहीं मिल पाने के कारण रेट्रोफिटिंग का काम ठीक से शुरू भी नहीं हो पाया है। रेट्रोफिटिंग पर दो पहिया को पांच हजार प्रति वाहन, तीन पहिया को 10 हजार और कार को 25 हजार प्रोत्साहन राशि देने का प्रविधान किया गया था। हालांकि, कमर्शियल वाहनों जैसे ई-बस, ट्रक, ट्रैक्टर और एंबुलेंस को दो वर्ष यानी 27 मार्च, 2027 तक के लिए वाहन कर व पंजीयन शुल्क में दी गई छूट लागू रहेगी।पंजीयन लक्ष्य और पांच मॉडल ईवी शहर इधर, पांच साल में दोपहिया वाहनों में 40 प्रतिशत और चार पहिया वाहनों के 15 प्रतिशत ईवी के पंजीयन का लक्ष्य रखा गया था। 27 मार्च को टैक्स में छूट खत्म होने से लक्ष्य प्रभावित हो सकता है। नीति लागू होने से पांच साल की अवधि में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को मॉडल ईवी शहर घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति अवधि के अंत तक 80 प्रतिशत सरकारी वाहनों को ईवी करने का लक्ष्य भी रखा गया है। यह भी पढ़ें- डेढ़ माह में भी खर्च नहीं कर पाए चोरी किए गए रुपये और तेल-घी, नाबालिग साथी के साथ धराया आरोपी, सामान भी बरामद चार्जिंग स्टेशनों को वित्तीय सहायता देगी सरकार ईवी नीति के तहत सार्वजनिक स्थलों पर चार्जिंग स्टेशनों के लिए वित्तीय सहायता का भी प्रविधान है। राजमार्गों, प्रमुख सड़कों पर प्रत्येक 25 किमी पर एक चार्जिंग स्टेशन, राजमार्गों पर प्रत्येक 100 किमी पर लंबी दूरी/हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक वाहन के लिए फास्ट चार्जिंग स्टेशन (दोनों तरफ) लगाए जाएंगे। नीति अवधि के अंत तक सभी पेट्रोल पंपों पर कम से कम एक इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट लगाने का लक्ष्य है।

March 21, 2026 12:53 UTC


'धुरंधर धामी' मारेंगे छक्का; हल्द्वानी में राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, वैश्विक संकट का किया जिक्र

लेखक के बारे में राहुल पराशर राहुल पराशर, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर जर्नलिस्ट हैं। वे राजनीति, करेंट अफेयर्स, डेवलपमेंट, ब्यूरोक्रेसी, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्राउंड रिपोर्टिंग का 20 साल का अनुभव रखते हैं। करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने प्रशासन, सिविक इश्यू को कवर किया। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक पत्रकारिता के गुर भी सीखे। बिहार विधानसभा चुनाव 2005 से लेकर लोकसभा चुनाव 2024 तक 10 चुनावों में रिपोर्टिंग की है। इसमें बिहार विधानसभा चुनाव फरवरी 2005, अक्टूबर-नवंबर 2005, लोकसभा चुनाव 2009, बिहार विधानसभा चुनाव 2010, लोकसभा चुनाव 2014, बिहार विधानसभा चुनाव 2015, लोकसभा चुनाव 2019, बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में ग्राउंड रिपोर्टिंग शामिल है। इसके अलावा यूपी चुनाव 2022 और लोकसभा चुनाव 2024 का का विश्लेण किया। इस दौरान बिहार, झारखंड और यूपी के निकाय चुनावों को कवर किया। पिछले करीब चार साल से NBT (Digital) में यूपी डेस्क काम कर रहे हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय विद्या भवन, मुंबई से जुड़े पीकेआईएमएस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।... और पढ़ें

March 21, 2026 12:45 UTC


‘घने कोहरे में हुआ एक्सीडेंट, गोतस्करी का मामला नहीं’, मथुरा में फरसा वाले बाबा की मौत पर पुलिस का बड़ा बयान

मथुरा के थाना कोसीकलां क्षेत्र में चंद्रशेखर उर्फ फरसा वाले बाबा की मौत के मामले में पुलिस ने आधिकारिक रूप से इसे दुर्घटना बताया है. टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाबा की मौके पर ही मौत हो गई.' गोतस्करी के आरोपों का पुलिस ने किया खंडनपुलिस के अनुसार नागालैंड नंबर कंटेनर में साबुन–सर्फ और किराने का सामान था. घटना के बाद माहौल गर्मबाबा की मौत के बाद स्थानीय क्षेत्र में गुस्सा और अफरा-तफरी का माहौल रहा. पुलिस की जांच के मुताबिक, यह मामला गोतस्करों द्वारा जानबूझकर कुचले जाने का नहीं, बल्कि घने कोहरे के कारण हुआ सड़क हादसा है.

Source:NDTV

March 21, 2026 12:36 UTC


रूस ने ईरान के साथ 'धोखेबाजी' करने वाली रिपोर्ट को बताया फर्जी, दावा- पुतिन के दूत ने US के सामने रखा था डील का प्रस्ताव

लेखक के बारे में अभिजात शेखर आजाद अभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं।अभिजात ने अपने करियर में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) के भू-राजनीतिक संकटों का सूक्ष्म विश्लेषण किया है। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं।प्रमुख उपलब्धियां और विशेषज्ञता:रक्षा और सैन्य विश्लेषण: राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।चुनाव कवरेज: कई भारतीय लोकसभा चुनावों और प्रमुख वैश्विक चुनावों की ग्राउंड और संपादकीय रिपोर्टिंग।पुरस्कार: पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए दो बार प्रतिष्ठित ENBA अवार्ड से सम्मानित।इंटरव्यू: वैश्विक नीति निर्माताओं, पूर्व राजनयिकों और रक्षा विशेषज्ञों के साथ विशेष संवाद।अभिजात का लक्ष्य वैश्विक घटनाओं के पीछे छिपे 'असली कारणों' को उजागर करना है, ताकि पाठक केवल खबर न पढ़ें, बल्कि उसके दूरगामी प्रभावों को भी समझ सकें।... और पढ़ें

March 21, 2026 12:28 UTC


Himachal Budget: क्यों कम हुआ हिमाचल का बजट आकार, प्रदेश पर पड़ेगा कितना असर?

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पहली बार बजट आकार कम किया है। इसके पीछे कई वजह मानी जा रही हैं। मुख्यत राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने का असर हिमाचल प्रदेश के बजट पर साफ तौर पर दिखाई दिया है। वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट का कुल आकार इस बार घटकर 54,928 करोड़ रुपये रह गया है, जो पिछले बजट 58,514 करोड़ रुपये की तुलना में 3,586 करोड़ रुपये कम है।वित्तीय संसाधनों में आई इस कमी को राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बजट भाषण में कहा कि केंद्र से मिलने वाला आरडीजी बंद होने के कारण राज्य को अपने संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर ध्यान देना होगा।बजट आकार कम होने से सरकार अपने खर्च में कटौती कर सकती है, इसके अलावा कुछ संस्थानों को भी बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है। अधूरे प्रोजेक्ट पूरा करने पर जोर इसके बावजूद सरकार ने विकास कार्यों को गति देने के लिए कई घोषणाएं की हैं। सीएम ने बताया कि ऐसे विकास कार्य जो 70 प्रतिशत तक पूरे हो चुके हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। इसके लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रविधान किया गया है, ताकि अधूरे प्रोजेक्ट जल्द जनता को समर्पित किए जा सकें।खाली पड़े भवनों का होगा सामुदायिक उपयोग इसके अलावा, पूर्व सरकार के कार्यकाल में निर्मित लेकिन उपयोग में नहीं आ रहे भवनों को अब सामुदायिक उपयोग में लाने का निर्णय लिया गया है। इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर लोगों को सुविधाएं भी मिलेंगी। सीमित वित्तीय संसाधनों के बावजूद विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी और प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं को पूरा किया जाएगा।

March 21, 2026 12:27 UTC


'भारत के अल्पसंख्यकों का नेतृत्व नहीं करता जिन्ना, लाखों लाशों के ऊपर बनाया है पाकिस्तान'; एबीवीपी ने दी दलील

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू विश्चविद्यालय में एमए पालिटिकल साइंस में पढ़ाए जा रहे मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर छात्रों का कहना है कि वह भारत के अल्पसंख्यकों का नेतृत्व नहीं करता और जिन्ना ने पाकिस्तान का निर्माण लाखों लोगों की लाशों के ऊपर किया है।जम्मू विवि के छात्र अमित सदोत्रा का कहना है कि जम्मू कश्मीर का युवा जिन्ना को नहीं पढ़ना चाहता है। पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के एक बड़े भाग पर आज भी कब्जा किया हुआ है। जम्मू के साथ लगते सियालकोट से लोगों की लाशों से भरी ट्रेन भारत भेजी है।लाखों लोग आज भी पाकिस्तान के कारण रिफ्यूजी जीवन यहां जी रहे हैं।यह सब जिन्ना के कारण ही हुआ है। वहीं अन्य छात्र दीपक का कहना है कि जम्मू कश्मीर का अगर विवि को पढ़ाना ही है तो अब्दुल्ल गफ्फार, एपीजे अब्दुल कलाम, अंबेडकर को पढ़ाएं जिन्होंने अल्पसंख्यकों को आवाज दी है। जिन्ना हमारे देश का नेता नहीं है और उसे जबरन हमारे ऊपर थोपना बर्दाश्त नहीं है।वहीं छात्रों का कहना है कि अब जब जम्मू कश्मीर के विलय को जम्मू कश्मीर की विधानसभा ने अंतिम मंजूरी दे दी है तो ऐसे में विवि का यह पाठ्यक्रम संदेह पैदा कर रहा है कि यहां अलगाववादी ताकतों को पाकिस्तान के इशारे पर मजबूत कर रहा है।उनका कहना है कि एमए पालिटिकल साइंस में माइनारिटीज एंड द नेशन में उन नेताओं का जिक्र होना चाहिए, जिन्होंने राष्ट्रनिर्माण का काम किया है, न कि देश के टुकड़े करने वालों काे शामिल किया जाए। जम्मू विवि ने किया समिति का गठन, सिलेबस की करेगी जांच पालिटिकल साइंस के सिलेबस को लेकर उठे विवाद के बीच जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह निर्णय छात्रों द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद लिया गया है।डीन एकेडमिक अफेयर्स कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति के निर्देश पर यह समिति बनाई गई है, जो सिलेबस से जुड़े विवादित पहलुओं की जांच करेगी। समिति के संयोजक प्रो. नरेश पाधा को नियुक्त किया गया है।इसके अलावा फिलासफी, इतिहास और सोशियोलाजी विभागों के विभागाध्यक्ष, डीएसआरएस के निदेशक तथा असिस्टेंट रजिस्ट्रार (एकेडमिक अफेयर्स) को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। असिस्टेंट रजिस्ट्रार को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने समिति को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की विस्तृत जांच कर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। माना जा रहा है कि समिति छात्रों और संबंधित पक्षों से भी बातचीत करेगी, ताकि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष निष्कर्ष निकाला जा सके।

March 21, 2026 12:05 UTC


Bhopal Bada Talab Encroachment Drone Photos

भोपाल के तालाब पर कब्जा भास्कर के ड्रोन में कैद:भोपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब पर अतिक्रमण की सारी हदें पार कर चुकी हैं। अतिक्रमणकारियों ने इसे चारों ओर से अतिक्रमण में जकड़ रखा है। सरकारी रिपोर्ट में ये सामने आ चुके हैं, पर कार्रवाई जमीन पर न होकर फाइलों में ही सिमटी रही।. अब एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्राइबल) की फटकार से अफसर हरकत में आए और सर्वे शुरू किया। दैनिक भास्कर ने 200 फीट की ऊंचाई से भोपाल की लाइफ लाइन से खिलवाड़ करने वाले अतिक्रमण को ड्रोन कैमरे में कैद किया।करीब 8 महीने पहले ही एफटीएल से जुड़कर ही एक 2 मंजिला मकान बना दिया गया। इसी में स्वीमिंग पूल भी है। इसे ही टीटी नगर एसडीएम वृत की टीम ने लिस्टेड किया है। इन अतिक्रमण की जद में रसूखदारों के साथ-साथ होटल जहांनुमा, सायाजी, वन विहार समेत नगर निगम के सरकारी निर्माण भी हैं।ड्रोन से देखिए बड़ा तालाब में अतिक्रमण की 5 तस्वीरें…बड़े तालाब के नजदीक स्विमिंग पूल और बंगला।बड़े तालाब से सटाकर इस तरह बंगले बनाए गए हैं।तालाब के किनारे लोगों ने प्लॉट काट दिए हैं।बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में फार्म हाउस भी बने हैं।तालाब के किनारे बनी कॉलोनियां और बढ़ती आबादी।सेवनिया गौंड, बिशनखेड़ी में मिले 20 से ज्यादा अतिक्रमण सर्वे टीम को सेवनिया गौंड, बिशनखेड़ी समेत आसपास के इलाकों में करीब तीन किमी के दायरे में 20 से ज्यादा बड़े अतिक्रमण लिस्टेड किए। इसमें फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल, स्वीमिंग पूल, टीन शेड बना चुके थे, जो एफटीएल से 50 मीटर के दायरे में ही हैं।सैर सपाटा, बोट क्लब-वन विहार का हिस्सा भी बड़ा तालाब किनारे प्राइवेट के साथ सरकारी अतिक्रमण भी सामने आया है। एफटीएल के 50 मीटर के दायरे में सैर सपाटा, बोट क्लब, विंड एंड वेव्स होटल और वन विहार का कुछ हिस्सा भी आ रहा है। प्रशासन ने इन्हें भी अतिक्रमण के तौर पर लिस्टेड किया है।सर्वे में इतने 220 अतिक्रमण सामने आए हैं बैरागढ़ सर्किल में 220 अतिक्रमण सामने आए हैं। इन्हें हटाने की प्रक्रिया जारी है। टीटी नगर में 127 अतिक्रमण चिह्नित कर नोटिस जारी किए हैं। इनमें 59 निजी और 78 सरकारी शामिल हैं। परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा की सास का रो-हाउस भी अतिक्रमण की सूची में शामिल हैं। प्रशासन की टीम ने सेवनिया गौंड, प्रेमपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में भी सीमांकन किया था।वन विहार के पास जॉक रेस्टोरेंट, लहर रेस्टोरेंट, विंड्स एंड वेब, होटल रंजीत लेकव्यू, फूड जोन की 26 दुकानें, गेम जोन, कचरा कैफे, सुलभ कॉम्प्लेक्स और लहर जिम सहित अन्य निर्माण शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि किनारे से 100 से अधिक झुग्गी भी हटेंगी।बड़ा तालाब की हद जानने इनका सीमांकन भी सूत्रों के अनुसार, वन विहार रोड स्थित होटल रंजीत, होटल टोरकस, अन्नतास गार्डन, लेक हाउस का कुछ हिस्सा आ रहा है। वहीं, मैथलीशरण गुप्ता, कीर्ति जैन, पीएस भटनागर, मोहिनी देवी, बसंत कौर, सौम्या श्रीवास्तव, प्रकाश चंदेल, मुकेश शर्मा आदि के निर्माण भी जद में आ रहे हैं।इसके अलावा बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में शामिल बड़ा तालाब का काफी हिस्सा भी जद में आ रहा है। कुछ दिन पहले इन पर कार्रवाई की गई। वहीं, टीटी नगर एसडीएम वृत्त की टीमें भी जल्द कार्रवाई करेगी।बड़ा तालाब के 5 बड़े इलाकों में पहुंची भास्कर टीम दैनिक भास्कर ने बड़ा तालाब के पिछले व मौजूदा 4 सर्वे, एनजीटी में याचिका और अब तक हुई कार्रवाई के बारे में पड़ताल की। तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) पर भी पहुंचा।एक्सपर्ट राशिद नूर ने बताया, शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन जब भास्कर टीम यहां पहुंची तो एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बने हुए नजर आए। ऐसे 1 या 2 नहीं, बल्कि सैकड़ों निर्माण है।कई रसूखदारों के फार्म हाउस भी किनारे पर हैं भदभदा, बिसनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव, सेवनिया गौंड और सूरजनगर में बड़ी बिल्डिंग, फॉर्म हाउस, रिसोर्ट भी देखने को मिले। बड़ा तालाब रामसर साइट भी है। बावजूद सालों से सिर्फ फाइलों में ही कब्जे हटे हैं।मुनार से जुड़ी बाउंड्रीवॉल मंगलवार को टीम जिस इलाके में सीमांकन करने पहुंची, वहां पर भास्कर टीम ने भी दौरा किया। सूरजनगर, सेवनिया गौंड में तो जिस जगह पर रामसर साइट है और नगर निगम की मुनार लगी है। ठीक उससे जुड़ी बिल्डिंग की बाउंड्रीवॉल थी।5 महीने पहले यहां नगर निगम की सीवेज लाइन भी बिछाई गई है। मुनार के पास सड़क भी भर दी गई है, जो नियम के विरुद्ध है। दूसरी ओर, गौरागांव से बील गांव की तरफ सड़क भी तालाब के बीच से ही गुजरी है।बड़ा फर्जीवाड़ा...दो तरह की मुनारें मिली बड़ा तालाब के किनारों पर भू-माफिया भी सक्रिय है, जो कम दाम पर प्लाट देने का वादा कर रहे हैं। उन्होंने और लोगों ने इस दायरे को लेकर ही भ्रम की स्थिति भी खड़ी की है। जिन मुनारों से एफटीएल की सीमा तय होती है, उन्हीं में फर्जीवाड़ा भी किया गया है।मौके पर एफटीएल बताने वाली 5 तरह की मुनारें लगी हुई मिली। इनमें से एक में बीएमसी यानी, भोपाल म्युनसिपल कॉरपोर्रेशन लिखा है। बाकी पर सफेद रंग है। लिखा कुछ नहीं है। इन्हीं फर्जी मुनारों के आसपास अतिक्रमण और अवैध निर्माण है।इसलिए सीमांकन शुरू किया करीब पांच महीने पहले बड़ा तालाब के अतिक्रमण पर एनजीटी सख्त हुआ था। तब कार्रवाई की सिर्फ रस्म अदा की गई थी। फरवरी में सांसद आलोक शर्मा ने जिम्मेदारों की बैठक लेकर फटकार लगा दी। इसके बाद फिर से सर्वे शुरू किया गया।बड़ा तालाब में अतिक्रमण को लेकर एनजीटी में एक याचिका पर्यावरणविद् राशिद नूर ने लगाई थी। इस पर एनजीटी ने स्पष्ट किया कि वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का नियम-4 अब पूरे मध्यप्रदेश के सभी जलाशयों पर लागू होगा।बड़ा तालाब का सिर्फ कागजों का मामला नहीं, बल्कि भोपाल के पर्यावरण संतुलन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। तालाब में अब 41 नालों से सीवेज गिर रहा है और 227 अतिक्रमण अब तक हटाए नहीं गए।सिलसिलेवार जानिए, अब तक क्या हुआ...पहला सर्वे: साल 2016

March 21, 2026 12:02 UTC


'ईरान में हमले से सत्ता परिवर्तन संभव', युद्ध से पहले मोसाद चीफ ने इजरायली पीएम को दी थी जानकारी, क्या बड़ी गलती कर दी?

लेखक के बारे में अभिजात शेखर आजाद अभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं।अभिजात ने अपने करियर में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) के भू-राजनीतिक संकटों का सूक्ष्म विश्लेषण किया है। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं।प्रमुख उपलब्धियां और विशेषज्ञता:रक्षा और सैन्य विश्लेषण: राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।चुनाव कवरेज: कई भारतीय लोकसभा चुनावों और प्रमुख वैश्विक चुनावों की ग्राउंड और संपादकीय रिपोर्टिंग।पुरस्कार: पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए दो बार प्रतिष्ठित ENBA अवार्ड से सम्मानित।इंटरव्यू: वैश्विक नीति निर्माताओं, पूर्व राजनयिकों और रक्षा विशेषज्ञों के साथ विशेष संवाद।अभिजात का लक्ष्य वैश्विक घटनाओं के पीछे छिपे 'असली कारणों' को उजागर करना है, ताकि पाठक केवल खबर न पढ़ें, बल्कि उसके दूरगामी प्रभावों को भी समझ सकें।... और पढ़ें

March 21, 2026 11:57 UTC


मिसाइल डिफेंस, एयर बेस: मिडिल ईस्ट में ईरानी हमलों से अमेरिका को 800 मिलियन डॉलर का नुकसान, ट्रंप को भारी पड़ी जंग

लेखक के बारे में विवेक सिंह विवेक सिंह, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में चीफ प्रिसिंपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पत्रकारिता में उनका करीब 12 वर्षों का अनुभव है। वह इंटरेशनल अफेयर्स (वर्ल्ड सेक्शन) को कवर कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के घटनाक्रम में विशेष रुचि है। अमर उजाला देहरादून के साथ डिजिटल पारी की शुरुआत की और फिर वन इंडिया हिंदा,एबीपी न्यूज से होते हुए नवभारत टाइम्स तक यह सफर जारी है। इस बीच न्यूज18 यूपी/उत्तराखंड के साथ टीवी की दुनिया और वीडियो न्यूज ऐप प्लेटफॉर्म के साथ भी काम किया। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है।... और पढ़ें

March 21, 2026 11:42 UTC


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